
Summary
साधक की पहचान और ध्यान की प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए, वक्ता ध्यान को एक ऊर्जा निर्माण के तरीके के रूप में परिभाषित करते हैं, जिसे ओजस कहा जाता है। वे बताते हैं कि भौतिक शरीर का निर्माण भोजन के पाचन से होता है, लेकिन यह शरीर केवल सुख का एक साधन है। ध्यान का उद्देश्य जीवन शक्तियों को एक उच्च स्तर पर ले जाना है, जिससे ओजस का निर्माण होता है। ओजस की तीव्रता और मात्रा व्यक्ति की उपस्थिति को अद्वितीय बनाती है।
वक्ता यह भी बताते हैं कि वर्तमान में आध्यात्मिक प्रक्रियाएं लोगों की प्राथमिकताओं में पीछे रह गई हैं, जिससे ऊर्जा और ओजस के उच्च स्तर को प्राप्त करना कठिन हो गया है। वे चेतावनी देते हैं कि अत्यधिक भौतिक इच्छाओं और दूषित वातावरण में रहने से ओजस का निर्माण बाधित होता है। ध्यान केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह सामूहिक खुशहाली का एक माध्यम है। जब एक समूह ध्यान में लीन होता है, तो यह सभी के लिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे वास्तविक शांति और खुशहाली की अनुभूति होती है।
Show Notes
2002 में, लेबनान में साधकों के साथ हुए एक सत्संग के दौरान, सद्गुरु ने ओजस के बारे में विस्तार से चर्चा की। यह ऊर्जा का एक गैर-भौतिक आयाम है जो जीवन और उसके परे की यात्रा को सुगम बनाता है। उन्होंने उन कार्यों के बारे में भी बताया जो ओजस को नष्ट करते हैं, और ओजस के निर्माण से कैसे हम दुनिया के लिए रूपांतरण का एक साधन बन सकते हैं।
Conscious Planethttps://www.consciousplanet.org
Sadhguru App (Download): https://onelink.to/sadhguru__app
Official Sadhguru Website: https://isha.sadhguru.org
Sadhguru Exclusive: https://sadhguru.co/exclusive-pd
Inner engineering Online: isha.co/ieo-podcast: Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices
More from सद्गुरु हिन्दी
सद्गुरु मध्य एशिया में प्रचलित एक प्राचीन तांत्रिक अनुष्ठान के बारे में बता रहे हैं - जहाँ वो महज़ कुछ घंटों में एक बीज से पेड़ उगाकर उस पर फल लगा देते हैं। इसके साथ ही वो कुण्डलिनी और कुण्डलिनी योग की बारीकियों को समझाते हैं, और ऊर्जा के इस परम स्रोत को छेड़ने के खतरों के बारे में भी बात करते हैं।
क्या आपकी आध्यात्मिक यात्रा आपके परिवार के लिए परेशानी बन रही है? 2007 में साधकों के साथ हुए एक सत्संग में, सद्गुरु ने भीतर की पुकार और रिश्तों के बीच के इस नाजुक संतुलन पर बात की। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों और प्राचीन ज्ञान के आधार पर इसे समझाया। उन्होंने कुछ बेहद शक्तिशाली देवियों की कहानियाँ भी साझा कीं और लिंग भैरवी की अद्भुत शक्ति और कृपा के बारे में बताया। Conscious Planethttps://www.consciousplanet.org
आकाश तत्व के बारे में विस्तार से बताते हुए सद्गुरु कहते हैं कि आकाश को ईथर भी कहा जाता है। ईथर या आकाश का मतलब स्पेस नहीं है, ईथर अस्तित्व का एक ऐसा आयाम है जो सूक्ष्म है। जब हम कहते हैं ‘स्पेस’, तो हम काल या अनस्तित्व के बारे में बात कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं ‘शि-व’ के बारे में – ‘वह जो नहीं है।’ जब हम कहते हैं ‘आकाश’, तो हम उसके बारे में बात कर रहे हैं ‘जो है।’ सद्गुरु यह भी बता रहे हैं कि प्राचीन ऋषि मुनियों ने हवाई जहाज बनाने की तकनीक पता होने पर भी हवाई जहाज क्यों नहीं बनाए।
सद्गुरु पानी के कुछ ऐसे पहलुओं पर प्रकाश डाल रहे हैं, जिन्हें बहुत ही कम लोग जानते हैं।
क्या सभी आत्मज्ञानी जीव कर्मों के बंधन से मुक्त होते हैं? क्या सद्गुरु के भी कर्म होते हैं? इस वीडियो में जानें।