सद्‌गुरु हिन्दी

#480 -ओजस – जीवन बदलने वाली ऊर्जा

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Summary

साधक की पहचान और ध्यान की प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए, वक्ता ध्यान को एक ऊर्जा निर्माण के तरीके के रूप में परिभाषित करते हैं, जिसे ओजस कहा जाता है। वे बताते हैं कि भौतिक शरीर का निर्माण भोजन के पाचन से होता है, लेकिन यह शरीर केवल सुख का एक साधन है। ध्यान का उद्देश्य जीवन शक्तियों को एक उच्च स्तर पर ले जाना है, जिससे ओजस का निर्माण होता है। ओजस की तीव्रता और मात्रा व्यक्ति की उपस्थिति को अद्वितीय बनाती है।

वक्ता यह भी बताते हैं कि वर्तमान में आध्यात्मिक प्रक्रियाएं लोगों की प्राथमिकताओं में पीछे रह गई हैं, जिससे ऊर्जा और ओजस के उच्च स्तर को प्राप्त करना कठिन हो गया है। वे चेतावनी देते हैं कि अत्यधिक भौतिक इच्छाओं और दूषित वातावरण में रहने से ओजस का निर्माण बाधित होता है। ध्यान केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह सामूहिक खुशहाली का एक माध्यम है। जब एक समूह ध्यान में लीन होता है, तो यह सभी के लिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे वास्तविक शांति और खुशहाली की अनुभूति होती है।

Show Notes

2002 में, लेबनान में साधकों के साथ हुए एक सत्संग के दौरान, सद्‌गुरु ने ओजस के बारे में विस्तार से चर्चा की। यह ऊर्जा का एक गैर-भौतिक आयाम है जो जीवन और उसके परे की यात्रा को सुगम बनाता है। उन्होंने उन कार्यों के बारे में भी बताया जो ओजस को नष्ट करते हैं, और ओजस के निर्माण से कैसे हम दुनिया के लिए रूपांतरण का एक साधन बन सकते हैं।

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