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विजय रथ श्री जस्टिस शिव दयालजी श्रीवास्तव द्वारा रामचरितमानस से चुनी हुई चौपाइयाँ एवं दोहे, जो 'उत्थान पथ' एवं 'साधना पथ' में प्रकाशित किए गए । MP3 - माधव मुकुंद और प्रार्थना श्रीवास्तव के स्वरों में दो.- वचनकर्म मन मोरि गति भजनु करहिं निःकाम । तिन्ह के हृदय कमल महुँ करउँ सदा विश्राम ।।सुनहु सखा कह कृपानिधाना । जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना ।।सौरज धीरज
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MP3 - मेरी महारानी वरदानी , धन्य धन्य विंध्याचल रानी - सौ. मीरा वर्मा मेरी महारानी वरदानी किधन्य धन्य विंध्याचल रानी ॥देवी पहाड़ों के ऊपर, एक मंदिर बना खासाजहां जगदम्बे, का वासा ॥मेरी महारानी वरदानी किधन्य धन्य विंध्याचल रानी ॥देवी तले बहे गंगा, गंगा निर्मल पानी,नहाये मेरी आदि शक्ति रानी ॥मेरी महारानी वरदानी किधन्य धन्य विंध्याचल रानी ॥देवी चंदन की चौकी,
Listen to Guru ki mahima koi na jaane sung by Dr. Ashok Shrivastavaगुरु परब्रह्म, गुरु भगवंतगुरु मेरी पूजा, गुरु गोबिंदगुरु परब्रह्म, गुरु भगवंतगुरु की महिमा, कोई न जानेजाने तो बस एक, शिष्य ही जानेसद्गुरु मोरे, जीवन आधारसद्गुरु मोरे, जीवन आधारगुरु की महिमा, कोई न जानेजाने तो बस एक, शिष्य ही जानेसद्गुरु मोरे, जीवन आधारसद्गुरु मोरे, जीवन आधारभक्ति मार्ग, गुरु जी बताएंभक्ति मार्ग, गुरु जी
Listen to Mere Gurudev Charano Me Suman Shraddha Ke sung by Shri Justice Shiv Dayal Ji Shrivastav मेरे गुरुदेव चरणों में, सुमन श्रद्धा के अर्पित है,तेरी ही देन है जो है, वही सेवा में अर्पित है।न प्रीति है प्रतीति है, नहीं पूजा की शक्ति है ।मेरा यह मन, मेरा यह तन, मेरा जीवन समर्पित है ॥तुम्ही हो भाव में मेरे, विचारों में, पुकारों में । तेरे चरणों पे हे गुरुवर, मेरा सर्वस्व अर्पित
Listen to He Mere Gurudev Karunasindhu Karuna Keejiyesung by Shri Justice Shiv Dayal Ji Shrivastav हे मेरे गुरुदेव, करुणासिन्धु, करुणा कीजिये ।हूँ अधम, आधीन, अशरण, अब शरण में लीजिये ॥खा रहा गोते हूँ मैं भवसिन्धु के मझधार में ।आसरा है दूसरा कोई न अब संसार में ॥मुझमें है जप तप न साधन और नहीं कुछ ज्ञान है ।निर्लज्जता है एक बाकी और बस अभिमान है ॥पाप बोझे से लदी नैया भँवर में जा रही ।नाथ
Listen to Ardas and Guru Nanak Aratiby Justice Shri Shiv Dayal Ji Shrivastav Listen to Additional Stuti after Ardasby Shri Anil Shrivastavअयोध्या जी के उदासीन संगत ऋषि आश्रम रानोपाली से दीक्षित (न्यायमूर्ति शिव दयाल जी की) पूज्य दादी के हस्तलेख में श्री राम जय राम जय जय राम एक ओंकार सतनाम करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुर प्रसादि। जपु। आदि