Storybox with Jamshed Qamar Siddiqui

शमशुद्दीन का बकरा: स्टोरीबॉक्स विद जमशेद

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Show Notes

महरौली में रहने वाले शमशुद्दीन का बकरा पूरी दिल्ली में मशहूर था. जमनापारी था, बड़े-बड़े कान, घुमावदार सींघ और तन के खड़ा हो जाए तो पूरा गधा मालूम होता था. शमशुद्दीन एक रोटी खुद कम खा सकते थे, मगर अपने बकरे को बिना चने खिलाए उन्हें नींद नहीं आती थी. लेकिन आख़िर एक रात को ऐसा क्या हुआ कि पूरा मोहल्ला उस बकरे के बाल को तावीज़ बनाकर पहनना चाहता था. स्टोरीबॉक्स में इस बार सुनिए 'शमशुद्दीन का बकरा 'स्टोरीबॉक्स' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Rohan Bharti

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ये कहानी है उस शायर की जिसे एक तानाशाह ने इसलिए जेल में डाल दिया क्योंकि उसके लिखे हुए शेर आवाम को जगा देते थे, आवाम सड़क पर आकर अपने हक़ मांगने लगती थी. उस सनकी तानाशाह ने कह दिया कि इस शायर को जेल में अकेले रखो और इसे कागज़-कलम नहीं मिलने चाहिए. वैसा ही किया गया. शायर जेल में अकेले था, न कागज़ था न कलम - लेकिन कोई किसी के ख़याल कैसे छीन सकता है. उस शायर ने अपने ज़हन में शेर कहे और जब कोई उससे मिलने आता था तो उसकी सिगरेट की डिब्बी के अंदर से निकलने वाले चमकीले कागज़ पर वो शायर अपनी नज़्म, शेर, ग़ज़ल या इंक़लाबी नारा लिख देता था. और इस तरह उस शायर की आवाज़ जेल के बाहर हो रहे प्रोटेस्ट में शामिल होती रही. उसके शब्द तानाशाह के खिलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों की आवाज़ बनते रहे. कौन था वो सनकी तानाशाह, कौन था ये शायर, इंकलाब की ये कहानी कहां की है? बता रहे हैं जमशेद क़मर सिद्दीक़ी स्टोरीबॉक्स के इस एपिसोड में.

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