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Sadhguru 360 के इस एपिसोड में, सद्गुरु कालभैरव के गहरे महत्व को उजागर कर रहे हैं। कालभैरव शिव का उग्र रूप हैं, समय के साक्षात स्वरूप हैं, और जीवन तथा मृत्यु के स्वामी हैं।
प्राचीन कथाओं, ब्रह्मा के पांचवें सिर की कहानी और काशी के महत्व के माध्यम से, सद्गुरु समझा रहे हैं कि कालभैरव कैसे अज्ञानता को नष्ट करते हैं, और जीवन व मृत्यु की दहलीज पर खड़े रहते हैं। सद्गुरु भैरवी यातना के बारे में भी बता रहे हैं। इस तीव्र प्रक्रिया से जीवन के अंतिम पलों में कई जन्मों के कर्म मिट सकते हैं। साथ ही, वे यह भी बता रहे हैं कि विभिन्न संस्कृतियों में ऐसा क्यों माना जाता है कि कुत्ते पास आती मृत्यु को भांप लेते हैं।
योग परंपरा, जीव विज्ञान और गणित में आठ और चौंसठ संख्याओं के प्रतीकात्मक महत्व पर प्रकाश डालते हुए, सद्गुरु बता रहे हैं कि ये पैटर्न पूरी सृष्टि में किस तरह गूंजते हैं।
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सद्गुरु मानव मन की प्रकृति पर नज़र डाल रहे हैं और बता रहे हैं कि कैसे अधिकांश लोग इसकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाते। वे हमें एक प्रक्रिया दे रहे हैं, जिसके रोजाना उपयोग से हम मन की वास्तविक क्षमताओं को उजागर कर सकते हैं।
2002 में, लेबनान में साधकों के साथ हुए एक सत्संग के दौरान, सद्गुरु ने ओजस के बारे में विस्तार से चर्चा की। यह ऊर्जा का एक गैर-भौतिक आयाम है जो जीवन और उसके परे की यात्रा को सुगम बनाता है। उन्होंने उन कार्यों के बारे में भी बताया जो ओजस को नष्ट करते हैं, और ओजस के निर्माण से कैसे हम दुनिया के लिए रूपांतरण का एक साधन बन सकते हैं।
सद्गुरु मध्य एशिया में प्रचलित एक प्राचीन तांत्रिक अनुष्ठान के बारे में बता रहे हैं - जहाँ वो महज़ कुछ घंटों में एक बीज से पेड़ उगाकर उस पर फल लगा देते हैं। इसके साथ ही वो कुण्डलिनी और कुण्डलिनी योग की बारीकियों को समझाते हैं, और ऊर्जा के इस परम स्रोत को छेड़ने के खतरों के बारे में भी बात करते हैं।
क्या आपकी आध्यात्मिक यात्रा आपके परिवार के लिए परेशानी बन रही है? 2007 में साधकों के साथ हुए एक सत्संग में, सद्गुरु ने भीतर की पुकार और रिश्तों के बीच के इस नाजुक संतुलन पर बात की। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों और प्राचीन ज्ञान के आधार पर इसे समझाया। उन्होंने कुछ बेहद शक्तिशाली देवियों की कहानियाँ भी साझा कीं और लिंग भैरवी की अद्भुत शक्ति और कृपा के बारे में बताया। Conscious Planethttps://www.consciousplanet.org
आकाश तत्व के बारे में विस्तार से बताते हुए सद्गुरु कहते हैं कि आकाश को ईथर भी कहा जाता है। ईथर या आकाश का मतलब स्पेस नहीं है, ईथर अस्तित्व का एक ऐसा आयाम है जो सूक्ष्म है। जब हम कहते हैं ‘स्पेस’, तो हम काल या अनस्तित्व के बारे में बात कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं ‘शि-व’ के बारे में – ‘वह जो नहीं है।’ जब हम कहते हैं ‘आकाश’, तो हम उसके बारे में बात कर रहे हैं ‘जो है।’ सद्गुरु यह भी बता रहे हैं कि प्राचीन ऋषि मुनियों ने हवाई जहाज बनाने की तकनीक पता होने पर भी हवाई जहाज क्यों नहीं बनाए।