
Show Notes
‘सद्गुरु 360’ के इस एपिसोड में सद्गुरु आधुनिक भारत के निर्माण की उस अनकही कहानी के बारे में बता रहे हैं, कि किस तरह 565 रियासतों में बंटे देश को एक राजनीतिक इकाई के रूप में संगठित किया गया।
भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के साहस, समझदारी और अटूट समर्पण की चर्चा करते हुए, सद्गुरु उस कूटनीतिक प्रयास की सराहना कर रहे हैं, जिसकी बदौलत एक अखंड राष्ट्र का निर्माण हुआ जिसे आज हम 'भारत' के रूप में जानते हैं।
सद्गुरु भारत की सिविल सेवाओं को आकार देने में सरदार पटेल की अहम भूमिका के बारे में भी चर्चा कर रहे हैं, जिसे उन्होंने देश को एकजुट रखने के लिए जरूरी 'स्टील फ्रेम' कहा था। इसके साथ ही, वे संविधान सभा में सरदार पटेल के योगदान पर भी प्रकाश डाल रहे हैं, जिसमें हाल ही में स्वतंत्र हुए देश के लिए राष्ट्रीय एकता, समान नागरिकता और प्रशासनिक मजबूती देने की उनकी कोशिशें शामिल हैं।
40:57 पर इस्तेमाल की गई तस्वीर अमित कुमार दीपांकर की किताब “इंडिया एवरीव्हेर” के कवर की है।
Conscious Planethttps://www.consciousplanet.org Sadhguru App (Download): https://onelink.to/sadhguru__app Official Sadhguru Website: https://isha.sadhguru.org Sadhguru Exclusive: https://sadhguru.co/exclusive-pd Inner engineering Online: isha.co/ieo-podcast: Learn more about your ad choices. Visit megaphone.fm/adchoices
More from सद्गुरु हिन्दी
2002 में, लेबनान में साधकों के साथ हुए एक सत्संग के दौरान, सद्गुरु ने ओजस के बारे में विस्तार से चर्चा की। यह ऊर्जा का एक गैर-भौतिक आयाम है जो जीवन और उसके परे की यात्रा को सुगम बनाता है। उन्होंने उन कार्यों के बारे में भी बताया जो ओजस को नष्ट करते हैं, और ओजस के निर्माण से कैसे हम दुनिया के लिए रूपांतरण का एक साधन बन सकते हैं।
सद्गुरु मध्य एशिया में प्रचलित एक प्राचीन तांत्रिक अनुष्ठान के बारे में बता रहे हैं - जहाँ वो महज़ कुछ घंटों में एक बीज से पेड़ उगाकर उस पर फल लगा देते हैं। इसके साथ ही वो कुण्डलिनी और कुण्डलिनी योग की बारीकियों को समझाते हैं, और ऊर्जा के इस परम स्रोत को छेड़ने के खतरों के बारे में भी बात करते हैं।
क्या आपकी आध्यात्मिक यात्रा आपके परिवार के लिए परेशानी बन रही है? 2007 में साधकों के साथ हुए एक सत्संग में, सद्गुरु ने भीतर की पुकार और रिश्तों के बीच के इस नाजुक संतुलन पर बात की। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों और प्राचीन ज्ञान के आधार पर इसे समझाया। उन्होंने कुछ बेहद शक्तिशाली देवियों की कहानियाँ भी साझा कीं और लिंग भैरवी की अद्भुत शक्ति और कृपा के बारे में बताया। Conscious Planethttps://www.consciousplanet.org
आकाश तत्व के बारे में विस्तार से बताते हुए सद्गुरु कहते हैं कि आकाश को ईथर भी कहा जाता है। ईथर या आकाश का मतलब स्पेस नहीं है, ईथर अस्तित्व का एक ऐसा आयाम है जो सूक्ष्म है। जब हम कहते हैं ‘स्पेस’, तो हम काल या अनस्तित्व के बारे में बात कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं ‘शि-व’ के बारे में – ‘वह जो नहीं है।’ जब हम कहते हैं ‘आकाश’, तो हम उसके बारे में बात कर रहे हैं ‘जो है।’ सद्गुरु यह भी बता रहे हैं कि प्राचीन ऋषि मुनियों ने हवाई जहाज बनाने की तकनीक पता होने पर भी हवाई जहाज क्यों नहीं बनाए।
सद्गुरु पानी के कुछ ऐसे पहलुओं पर प्रकाश डाल रहे हैं, जिन्हें बहुत ही कम लोग जानते हैं।